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जौहर  
शब्दभेद/रूपभेद
व्युत्पत्ति
शब्दार्थ एवं प्रयोग
सं.पु.
1.जवाहिरात, रत्न।
  • उदा.--घायल की गत घायल जांण्यां हिवड़ौ अगण संजोय। जौहर की गत जौहरी जांणै, क्या जांण्यां जिण खोय।--मीरां
2.तलवार के अच्छे लोहे के प्रमाण स्वरूप उस पर बनी हुई सूक्ष्म धारियां।
  • मुहावरा--तलवार रौ जौहर देखाणौ--रण-कुशलता का परिचय देना। बहादुरी से लड़ना।
3.विशेषता, खूबी, गुण।
  • मुहावरा--जौहर देखाणौ--विशेषता दिखाना, गुण प्रकट करना।
4.राजपूतों की युद्ध के समय की एक प्रथा--जब उन्हें यह विश्वास हो जाता है कि शत्रु गढ़ में प्रवेश कर जायगा तब वे तो केसरिया बाना पहन कर मरने के लिए शत्रु से भिड़ जाते थे और उनकी स्त्रियाँ गढ़ में ही चिता बनाकर जिन्दी ही आग में जल जाती थीं ताकि शत्रु उन्हें नहीं पा सके। क्रि.प्र.--करणौ, होणौ।
5.स्त्रियों के जलने के लिये दुर्ग में बनाई गई चिता।
6.आततायी (शासक) के विरुद्ध अन्याय के प्रतिकार के रूप में किसी के जल मरने की क्रिया।
रू.भे.
जंवर, जंवरी, जउहर, जउहरि, जमर, जमहर, जवहर, जूहर, जोहर, जो'र, ज्योहार।
(सं.जीव+हर)


नोट: पद्मश्री डॉ. सीताराम लालस संकलित वृहत राजस्थानी सबदकोश मे आपका स्वागत है। सागर-मंथन जैसे इस विशाल कार्य मे कंप्युटर द्वारा ऑटोमैशन के फलस्वरूप आई गलतियों को सुधारने के क्रम मे आपका अमूल्य सहयोग होगा कि यदि आपको कोई शब्द विशेष नहीं मिले अथवा उनके अर्थ गलत मिलें या अनैक अर्थ आपस मे जुड़े हुए मिलें तो कृपया admin@charans.org पर ईमेल द्वारा सूचित करें। हार्दिक आभार।






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