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अजर  
शब्दभेद/रूपभेद
व्युत्पत्ति
शब्दार्थ एवं प्रयोग
वि.
सं.
1.जो बूढ़ा न हो, जरारहित.
2.परमेश्वर का एक विशेषण.
3.वह द्रव्य या संपत्ति जो हजम न हो सके (दान)
  • उदा.--भय न हुए कर भरांत, अजर दांणौ जारण करै। खैरायत कर ख्यांत, नर खावै रे नोपला।--जालजी दधवाड़ियौ
4.बलवान, जबरदस्त.
5.जो हराया न जा सके.
6.अच्छा, भला, सुंदर। सं.पु.--
1.देवता.
2.महादेव.
3.विष्णु.
4.हनुमान.
5.श्रीकृष्ण (अ.मा.)


नोट: पद्मश्री डॉ. सीताराम लालस संकलित वृहत राजस्थानी सबदकोश मे आपका स्वागत है। सागर-मंथन जैसे इस विशाल कार्य मे कंप्युटर द्वारा ऑटोमैशन के फलस्वरूप आई गलतियों को सुधारने के क्रम मे आपका अमूल्य सहयोग होगा कि यदि आपको कोई शब्द विशेष नहीं मिले अथवा उनके अर्थ गलत मिलें या अनैक अर्थ आपस मे जुड़े हुए मिलें तो कृपया admin@charans.org पर ईमेल द्वारा सूचित करें। हार्दिक आभार।






राजस्थानी भाषा, व्याकरण एवं इतिहास

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