वि.
सं.
1.वह जो खुद कार्य रूप हो तथा जिसका कारण कोई हो, अर्थात् जो सदैव एक सा न रहे, जैसे संसार।
- उदा.--ए संसार अनित्य आदि सविकार उचारै।--रा.रू.
2.जो स्वयं कारण रूप हो और कार्य रूप न हो, असत्य, झूठा।
- उदा.--निरवांण नित्य अंतर अनित्य।--ऊ.का.
3.विनाशी, अस्थायी, नश्वर, नाशवान।