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आद  
शब्दभेद/रूपभेद
व्युत्पत्ति
शब्दार्थ एवं प्रयोग
वि.
सं.आदि
1.प्रथम, पहला, शुरू का, आरम्भ का, मूल, अग्र, उत्पत्ति स्थान।
  • उदा.--आदि न कौ तौ बिण अनंत, आतम क्रम्म न आद।--ह.र.
2.देखो 'आध'। सं.पु.--
1.परमेश्वर। सं.स्त्री.--
2.आरम्भ, बुनियाद.[फा.याद]
3.याद, स्मरण।
  • उदा.--अकबर कीना आद, हींदू न्रप हाजर हुवा। मेदपाट मरजाद, पग लागौ न प्रतापसी।--दुरसौ आढ़ौ
4.अदरख, अद्रक (मि.'आदौ')
5.आद्रा नक्षत्र।
  • कहावत--पहली आद टपूकड़ै मासां पखां मेह--आर्द्रा नक्षत्र के आरंभ में बूंदें पड़ जाएं तो महीने पंद्रह रोज में वर्षा हो।
[रा.]


नोट: पद्मश्री डॉ. सीताराम लालस संकलित वृहत राजस्थानी सबदकोश मे आपका स्वागत है। सागर-मंथन जैसे इस विशाल कार्य मे कंप्युटर द्वारा ऑटोमैशन के फलस्वरूप आई गलतियों को सुधारने के क्रम मे आपका अमूल्य सहयोग होगा कि यदि आपको कोई शब्द विशेष नहीं मिले अथवा उनके अर्थ गलत मिलें या अनैक अर्थ आपस मे जुड़े हुए मिलें तो कृपया admin@charans.org पर ईमेल द्वारा सूचित करें। हार्दिक आभार।






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