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आभ  
शब्दभेद/रूपभेद
व्युत्पत्ति
शब्दार्थ एवं प्रयोग
सं.स्त्री.
सं.आभा
1.शोभा, कांति, पानी, छवि।
  • उदा.--काळी कांणी कोझी कांमण, अपणी परणी आछी। अबछर आभ अवर अरधंगा, पदमण धरियै पाछी।--ऊ.का.
2.पानी (डिं.को.)। सं.पु.[सं.अभ्र]
3.आकाश। (मि.आभौ)
  • उदा.--नांम गोविंद थयौ नमौ नंदराय नंद, अमंद जस गोरधन आभ अड़ियौ।--बां.दा.
[फा.आब]


नोट: पद्मश्री डॉ. सीताराम लालस संकलित वृहत राजस्थानी सबदकोश मे आपका स्वागत है। सागर-मंथन जैसे इस विशाल कार्य मे कंप्युटर द्वारा ऑटोमैशन के फलस्वरूप आई गलतियों को सुधारने के क्रम मे आपका अमूल्य सहयोग होगा कि यदि आपको कोई शब्द विशेष नहीं मिले अथवा उनके अर्थ गलत मिलें या अनैक अर्थ आपस मे जुड़े हुए मिलें तो कृपया admin@charans.org पर ईमेल द्वारा सूचित करें। हार्दिक आभार।






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