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आर  
शब्दभेद/रूपभेद
व्युत्पत्ति
शब्दार्थ एवं प्रयोग
सं.पु.
1.बिना साफ किया हुआ एक प्रकार का निकृष्ट लोहा.
2.किनारा, कोना [सं.अर]
3.पहिए का आरा.
4.काँटा, पैना अंकुश.
5.हरताल.
6.शनि.
7.ताँबा.
8.पीतल.
9.बैल के हाँकने के डंडे के नीचे लगा कीला।
  • उदा.--धूंणै सिर पकड़ै धरा, असह सहैं जे आर। बौहळियां विरदावियां, गरज सरै नह तार।--बां.दा.
10.बिच्छू, भिड़ या मधुमक्खी का डंक। [सं.]
11.मंगल ग्रह।
  • उदा.--उदैहाट की बंगड़ा दंत ईसा, सुहावै लियां आर राका ससी सा।--वं.भा.
12.चमड़ा छेदने का सुआ या टेकुआ.[रा.]
13.जिद, टेक, हठ।
[सं.अल=डंक]
[सं.आरी]


नोट: पद्मश्री डॉ. सीताराम लालस संकलित वृहत राजस्थानी सबदकोश मे आपका स्वागत है। सागर-मंथन जैसे इस विशाल कार्य मे कंप्युटर द्वारा ऑटोमैशन के फलस्वरूप आई गलतियों को सुधारने के क्रम मे आपका अमूल्य सहयोग होगा कि यदि आपको कोई शब्द विशेष नहीं मिले अथवा उनके अर्थ गलत मिलें या अनैक अर्थ आपस मे जुड़े हुए मिलें तो कृपया admin@charans.org पर ईमेल द्वारा सूचित करें। हार्दिक आभार।






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