सं.स्त्री.
1.कुछ समय तक एक ही दशा में रहने से चित्त की खिन्नता, उचाट.
2.उद्वेग, घबराहट, आकुलता.
4.लगातार न्यून मात्रा में बरसने वाले वे बादल जिनकी गति पश्चिम से पूर्व की ओर अथवा दक्षिण से ऊत्तर की ओर होती है।
- उदा.--ऊबां जळ नदियां लहर, बक पंगत भर बाथ। मोरां सोर ममोलियां, सांवण लायौ साथ।--अज्ञात