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ओट  
शब्दभेद/रूपभेद
व्युत्पत्ति
शब्दार्थ एवं प्रयोग
सं.स्त्री.
1.आड़, रोक, जिससे सामने की वस्तु न दिखाई दे।
  • उदा.--1..लुकाती दिवलौ अंबर ओट, निरखवा आई औ संसार।--सांझ
  • उदा.--2..ओट उस ही की पकड़िए, उस ही का सरणा।--केसोदास गाडण
2.बाधा, रोक, व्यवधान.
3.दोष (अ.मा.)
4.शरण, पनाह, रक्षा, सहारा।
  • उदा.--1..तरै न लागै ताव, ओट तुहाळी आवियां। नदी हुई तूं नाव, भव सागर भागीरथी।--बां.दा.
  • उदा.--2..क्रत दत कौट किया हूं यधकौ, हरि नग ओट रहांणौ।--र.ज.प्र.
5.किसी वस्त्र का वह छोर जो किंचित्‌ मोड़ कर सिलाई किया गया हो, गोट, किनार।


नोट: पद्मश्री डॉ. सीताराम लालस संकलित वृहत राजस्थानी सबदकोश मे आपका स्वागत है। सागर-मंथन जैसे इस विशाल कार्य मे कंप्युटर द्वारा ऑटोमैशन के फलस्वरूप आई गलतियों को सुधारने के क्रम मे आपका अमूल्य सहयोग होगा कि यदि आपको कोई शब्द विशेष नहीं मिले अथवा उनके अर्थ गलत मिलें या अनैक अर्थ आपस मे जुड़े हुए मिलें तो कृपया admin@charans.org पर ईमेल द्वारा सूचित करें। हार्दिक आभार।






राजस्थानी भाषा, व्याकरण एवं इतिहास

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