सं.स्त्री.
1.आड़, रोक, जिससे सामने की वस्तु न दिखाई दे।
- उदा.--1..लुकाती दिवलौ अंबर ओट, निरखवा आई औ संसार।--सांझ
- उदा.--2..ओट उस ही की पकड़िए, उस ही का सरणा।--केसोदास गाडण
4.शरण, पनाह, रक्षा, सहारा।
- उदा.--1..तरै न लागै ताव, ओट तुहाळी आवियां। नदी हुई तूं नाव, भव सागर भागीरथी।--बां.दा.
- उदा.--2..क्रत दत कौट किया हूं यधकौ, हरि नग ओट रहांणौ।--र.ज.प्र.
5.किसी वस्त्र का वह छोर जो किंचित् मोड़ कर सिलाई किया गया हो, गोट, किनार।