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करण  
शब्दभेद/रूपभेद
व्युत्पत्ति
शब्दार्थ एवं प्रयोग
सं.पु.
सं.
1.हथियार.
2.इंद्रिय.
3.देह (डिं.को.)
4.क्रिया.
5.कार्य.
6.स्थान.
7.हेतु.
8.कायस्थों का एक भेद (मा.म.) [सं.कर्ण]
9.कान (अ.मा., डिं.को.)
10.कुन्ती के गर्भ से कुमारावस्था में उत्पन्न सूर्य्य का पुत्र। पर्याय.--अंगराज, अरकज, करन, चंपाधिप, भांणसुतन, रविसुत, राधातनय, राधेय, सूततनय।
11.डिंगल कोष के अनुसार दो गुरु मात्रा का नाम ऽऽ.
12.हाथ.
13.छप्पय छंद का एक भेद जिसमें 67 गुरु 18 लघु से 85 वर्ण या 152 मात्राएं होती हैं.14 व्याकरण में तीसरा कारक.
15.ज्योतिष में तिथियों का एक विभाग.
16.धनुष।
17.गणित ज्योतिष की एक क्रिया.
18.सूर्य की रश्मि, किरण.
19.समूह (अ.मा.)


नोट: पद्मश्री डॉ. सीताराम लालस संकलित वृहत राजस्थानी सबदकोश मे आपका स्वागत है। सागर-मंथन जैसे इस विशाल कार्य मे कंप्युटर द्वारा ऑटोमैशन के फलस्वरूप आई गलतियों को सुधारने के क्रम मे आपका अमूल्य सहयोग होगा कि यदि आपको कोई शब्द विशेष नहीं मिले अथवा उनके अर्थ गलत मिलें या अनैक अर्थ आपस मे जुड़े हुए मिलें तो कृपया admin@charans.org पर ईमेल द्वारा सूचित करें। हार्दिक आभार।






राजस्थानी भाषा, व्याकरण एवं इतिहास

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