8.कायस्थों का एक भेद (मा.म.) [सं.कर्ण]
10.कुन्ती के गर्भ से कुमारावस्था में उत्पन्न सूर्य्य का पुत्र। पर्याय.--अंगराज, अरकज, करन, चंपाधिप, भांणसुतन, रविसुत, राधातनय, राधेय, सूततनय।
11.डिंगल कोष के अनुसार दो गुरु मात्रा का नाम ऽऽ.
13.छप्पय छंद का एक भेद जिसमें 67 गुरु 18 लघु से 85 वर्ण या 152 मात्राएं होती हैं.14 व्याकरण में तीसरा कारक.
15.ज्योतिष में तिथियों का एक विभाग.
17.गणित ज्योतिष की एक क्रिया.