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गगन  
शब्दभेद/रूपभेद
व्युत्पत्ति
शब्दार्थ एवं प्रयोग
सं.पु.
सं.
1.आकाश, आसमान (डिं.को.)
रू.भे.
गएण, गगण, गयण।
यौ.
गगनगति, गगनगाज, गगनचर, गगनचख, गगनचुंबी, गगनध्वज, गगनपति, गगनफाळ, गगनबांण, गगनभेदी, गगनमंडळ, गगनरूप, गगनवटी, गगनवांणी, गगनस्पर्शी, गगनेचर।
2.छप्पय छंद का 61 वां भेद जिसमें 10 गुरु और 132 लघु सहित 142 वर्ण या 152 मात्राएं होती हैं (र.ज.प्र.)
3.आर्यागीति या खंधाण (स्कंधक) का भेद विशेष (पिं.प.)


नोट: पद्मश्री डॉ. सीताराम लालस संकलित वृहत राजस्थानी सबदकोश मे आपका स्वागत है। सागर-मंथन जैसे इस विशाल कार्य मे कंप्युटर द्वारा ऑटोमैशन के फलस्वरूप आई गलतियों को सुधारने के क्रम मे आपका अमूल्य सहयोग होगा कि यदि आपको कोई शब्द विशेष नहीं मिले अथवा उनके अर्थ गलत मिलें या अनैक अर्थ आपस मे जुड़े हुए मिलें तो कृपया admin@charans.org पर ईमेल द्वारा सूचित करें। हार्दिक आभार।






राजस्थानी भाषा, व्याकरण एवं इतिहास

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