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गजबंद, गजबंध  
शब्दभेद/रूपभेद
व्युत्पत्ति
शब्दार्थ एवं प्रयोग
सं.पु.
सं.गजबंध
1.एक प्रकार का चित्रकाव्य जिसमें किसी कविता के अक्षरों को हाथी का एक चित्र बना कर उसके अंग-प्रत्यंग में भर देते हैं.
2.जिसके यहाँ हाथी बंधते हों, राजा, महाराजा।
  • उदा.--1..पाखांणां चुणिया सह पड़सी, अधका दिन जातां अनमंध। बडा-बडा गजबंध बखांणै, बापाहरा तणां धजबंध।--दुरसौ आढ़ौ
  • उदा.--2..अगनि सोर गाजसी, पवन वाजसी, गजबंध छत्रबंध गजराज गुड़सी, हिंदू असुरांइण लड़सी।--वचनिका


नोट: पद्मश्री डॉ. सीताराम लालस संकलित वृहत राजस्थानी सबदकोश मे आपका स्वागत है। सागर-मंथन जैसे इस विशाल कार्य मे कंप्युटर द्वारा ऑटोमैशन के फलस्वरूप आई गलतियों को सुधारने के क्रम मे आपका अमूल्य सहयोग होगा कि यदि आपको कोई शब्द विशेष नहीं मिले अथवा उनके अर्थ गलत मिलें या अनैक अर्थ आपस मे जुड़े हुए मिलें तो कृपया admin@charans.org पर ईमेल द्वारा सूचित करें। हार्दिक आभार।






राजस्थानी भाषा, व्याकरण एवं इतिहास

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