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गटौ  
शब्दभेद/रूपभेद
व्युत्पत्ति
शब्दार्थ एवं प्रयोग
सं.पु.
1.एक पक्षी विशेष जिसका मांस अच्छा होता है और शिकारी बड़े चाव से खाते हैं। यह पक्षी शीतकाल के आरम्भ में उत्तरी ऐशिया से आता है और शीतकाल की समाप्ति पर वापिस लौट जाता है.
2.तम्बाकू की डिबिया.
3.एक प्रकार का घोड़ा (शा.हो.)
4.बेसन या मोठ के आटे का बेल कर बनाया हुआ खाद्य जिसके टुकड़ों को उबाल कर या तल कर प्रायः शाक बनाया जाता है.
5.पैर की नली और तलुए के बीच की गांठ.
6.हाथ की कलाई के जोड़ पर एक ओर उभरी हुई गांठ.
7.व्यवस्थित रूप से लपेटा हुआ धागा
(अल्पा.--गट्टी)
8.वह उपकरण जिस पर व्यवस्थित रूप से धागा लपेटा जाय। यह प्रायः लकड़ी का ही होता है
(अल्पा.--गट्टी)
9.हुक्के के नैचे के नीचे की वह गांठ जहाँ दोनों से मिलती हैं और जो फरशी या हुक्के के मुंह पर रहती है.
10.वे घने बादल जो आच्छादित होने पर एक ही बार में सूर्य के प्रकाश को रोक देते हैं (क्षेत्रीय) वि.--किसी शब्द के अंत में लग कर तुल्य, बराबर, सदृश आदि अर्थ देने वाला एक विशेषण, ज्यूं--लुगाईगटौ मिनख।


नोट: पद्मश्री डॉ. सीताराम लालस संकलित वृहत राजस्थानी सबदकोश मे आपका स्वागत है। सागर-मंथन जैसे इस विशाल कार्य मे कंप्युटर द्वारा ऑटोमैशन के फलस्वरूप आई गलतियों को सुधारने के क्रम मे आपका अमूल्य सहयोग होगा कि यदि आपको कोई शब्द विशेष नहीं मिले अथवा उनके अर्थ गलत मिलें या अनैक अर्थ आपस मे जुड़े हुए मिलें तो कृपया admin@charans.org पर ईमेल द्वारा सूचित करें। हार्दिक आभार।






राजस्थानी भाषा, व्याकरण एवं इतिहास

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