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गत  
शब्दभेद/रूपभेद
व्युत्पत्ति
शब्दार्थ एवं प्रयोग
वि.
सं.
1.गया हुआ, बीता हुआ।
  • उदा.--अज नव बारह अब्द गत, सक विक्रम संबंध। दिन नवमी आसाढ़ बदि, मीणां तेड़ि मदंध।--वं.भा.
  • मुहावरा--गत होणौ--मरना।
2.रहित, हीन, खाली।
  • उदा.--गत प्रभा थियौ ससि रयणि गळंती, वर मंदासइ वदन वरि। दीपक परजळतौइ न दीपै, नासफरिम सू रतनि नरि।--वेलि.
1.समय (अ.मा.)
2.हालत, अवस्था, दशा।
  • उदा.--तारां सेखैजी कयौ, 'रावजी, मैं थांरौ कांईं बिगाड़ कियौ, म्हे तौ जमी रै कारणै काकौ भतीजौ विढ़ता हा पण जा मैं गत हुई सो तैं गत हुयज्यौ।--द.दा.
  • मुहावरा--1.गत रौ--अच्छा, भला.
  • मुहावरा--2.गत बणाणी--दुर्दशा करनी, दुर्गति करना, अपमान करना, मारना-पीटना, उपहास करना, उल्लू बनना।
4.संगीत में बाजों के कुछ बोलों का क्रमबद्ध मिलान।
  • उदा.--ढोली वाहर रौ ढोल जूंझाऊ अनै खातौ घणौ लियौ तद कहै छै। वीरांगना वचन--ए ढोलण, ढोली नूं कह इतरी ढोल री पलां (ढोल री पौह व गत) में इतरी क्यूं ताकीद करै।--वीर सतसई की टीका
5.नृत्य में शरीर का विशेष संचालन और मुद्रा।
  • उदा.--ताथेई ताथेई थेई थेई थेई ताता, गतां लै अहेस माथा नंद रौ गवाळ।--र.ज.प्र.
6.प्रकार, ढंग, तरह।
  • उदा.--जस री गत अदभूत जिका, सत धारियां सुहाय। नर जीवै नर लोक में, जस अमरापुर जाय।--बां.दा.
7.गति, चाल।
  • उदा.--1..हुवौ नचीतौ पवन हव, अस रीतौ भौ आज। जीतौ खगपत गत जिकौ, बीतौ चीतौ बाज।--रिवदांन महडू
  • उदा.--2..गत गैवर कटि केहरी, रमणी हाटक रंग। कुच गिरवर लोयण कमळ, ऐ है कुसळे अंग।--बां.दा.
रू.भे.
(गति)
8.गति, मोक्ष।
  • उदा.--1..राव बड़ौ रजपूत छै, सूरवीर छै। पाछौ जाय कांम आयसूं तौ गत होयसी।--डाढाळा सूर री बात
  • उदा.--2..ग्राह जिसा अधमां दीन्हीं गत, तोनूं राघव कांय न तारै।--र.ज.प्र.
  • मुहावरा--गत होणी--मोक्ष होना।
  • कहावत--रांम-रांम सत है, आगे गियां गत है--राम का नाम ही सत्य है जिसके स्मरण मात्र से परलोक में मोक्ष की प्राप्ति होती है।
रू.भे.
(गति)
9.लीला।
  • उदा.--अकरम करम उपाय कर, जागविया तैं जीव। जगपत को जांणै नहीं, गत थारी हैग्रीव।--ह.र.
  • कहावत--रांम री गत हीरा रौ भाई कोयलौ व्है है--ईश्वर की भी क्या लीला है? हीरा जिसकी लाखों रुपयों की कीमत होती है, कोयले की खान में मिलता है।
10.गाय (अ.मा.)
सं.स्त्री.--
क्रि.प्र.--करणी, होणी।
क्रि.प्र.--करणी, होणी।
क्रि.प्र.--लेणी।
[सं.गति]
क्रि.प्र.--गत मिळणी, गत होणी।
क्रि.प्र.--करणी।
[रा.]


नोट: पद्मश्री डॉ. सीताराम लालस संकलित वृहत राजस्थानी सबदकोश मे आपका स्वागत है। सागर-मंथन जैसे इस विशाल कार्य मे कंप्युटर द्वारा ऑटोमैशन के फलस्वरूप आई गलतियों को सुधारने के क्रम मे आपका अमूल्य सहयोग होगा कि यदि आपको कोई शब्द विशेष नहीं मिले अथवा उनके अर्थ गलत मिलें या अनैक अर्थ आपस मे जुड़े हुए मिलें तो कृपया admin@charans.org पर ईमेल द्वारा सूचित करें। हार्दिक आभार।






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