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गरदी  
शब्दभेद/रूपभेद
व्युत्पत्ति
शब्दार्थ एवं प्रयोग
सं.स्त्री.
फा.गर्दी
1.भीड़, समूह। ज्यूं-गाड़ी में आज घणी गरदी है।
2.परिवर्तन।
3.धूलि, रज.
  • उदा.--वांरै खुद रै जीवण रा सपना तौ इण समाज री गरदी में ठोड़-ठोड़ बिखर नै अलोप व्हैगा।--विजयदांन देथा
4.क्रांति।
  • उदा.--दिखणी घणा मारांणा, भाऊ री कतळ भाऊ गरदी कहांणी।--बां.दा.ख्यात


नोट: पद्मश्री डॉ. सीताराम लालस संकलित वृहत राजस्थानी सबदकोश मे आपका स्वागत है। सागर-मंथन जैसे इस विशाल कार्य मे कंप्युटर द्वारा ऑटोमैशन के फलस्वरूप आई गलतियों को सुधारने के क्रम मे आपका अमूल्य सहयोग होगा कि यदि आपको कोई शब्द विशेष नहीं मिले अथवा उनके अर्थ गलत मिलें या अनैक अर्थ आपस मे जुड़े हुए मिलें तो कृपया admin@charans.org पर ईमेल द्वारा सूचित करें। हार्दिक आभार।






राजस्थानी भाषा, व्याकरण एवं इतिहास

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