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गाल
शब्दभेद/रूपभेद
व्युत्पत्ति
शब्दार्थ एवं प्रयोग
सं.पु.
1.आँखों के नीचे का मुँह के दोनों ओर ठुड्डी और कनपटी के बीच का भाग जो बहुत कोमल होता है। कपोल। पर्याय.--कपोल, स्रकवण।
मुहावरा--
1.गाल तोड़णौ--जबरदस्ती चुम्बन कर लेना.
मुहावरा--
2.गाल पिचकणा--कमजोर होना, कृशगात होना.
मुहावरा--
3.गाल फूलणा--मोटा-ताजा होना.
मुहावरा--
4.गाल बजाणा--बढ़-बढ़ कर बातें मारना.
मुहावरा--
5.गालां में घोड़ा दौड़णा--बिना आय का फिक्र किए खर्चे की बढ़ा-चढ़ा कर बातें मारना, विभिन्न स्वादु पदार्थों के खाने की तीव्र इच्छा होना।
कहावत--
1.गाल थाप आंतरौ कितरो'क--गाल और थप्पड़ के बीच फासला कितना? सन्निकटता के लिए कही गई कहावत.
कहावत--
2.थाप देनै गाल रातौ करणौ--थप्पड़ लगा कर मुँह लाल रखना; जैसे तैसे इज्जात को बचाए रखना।
रू.भे.
(गल्ल)
(अल्पा.--गालड़ियौ, गालड़ौ)
नोट:
पद्मश्री डॉ. सीताराम लालस संकलित वृहत राजस्थानी सबदकोश मे आपका स्वागत है। सागर-मंथन जैसे इस विशाल कार्य मे कंप्युटर द्वारा ऑटोमैशन के फलस्वरूप आई गलतियों को सुधारने के क्रम मे आपका अमूल्य सहयोग होगा कि यदि आपको कोई शब्द विशेष नहीं मिले अथवा उनके अर्थ गलत मिलें या अनैक अर्थ आपस मे जुड़े हुए मिलें तो कृपया admin@charans.org पर ईमेल द्वारा सूचित करें। हार्दिक आभार।
राजस्थानी भाषा, व्याकरण एवं इतिहास
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