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घड़  
शब्दभेद/रूपभेद
व्युत्पत्ति
शब्दार्थ एवं प्रयोग
सं.स्त्री.
सं.घटा
1.सेना, फौज, दल।
  • उदा.--विचित्रांण निवड़ घड़ महण वेळ, मुरधरां नरां हुय निजर मेळ। बळ दाख दुहूं दिस सस्त्र बंध, किलवांण पेख वळिया कमंध।--रा.रू.
2.मेघ, बादल।
  • उदा.--आज धरा-दस ऊनम्यउ, काळी घड़ सखरांह। उवा धण देसी ओळंबा, कर कर लांबी बांह।--ढो.मा.
3.करवट.
4.गगरी, छोटा घड़ा.
5.समूह, झुंड।
  • उदा.--ऊठे सुण अंगद वयण, विग्रह कज रघुबीर। ओपे गज घड़ ऊपरां, कोपे जांण कंठीर।--र.रू.
7.तरतीब से जमाये हुए कपड़े या वस्त्र की तह.[सं.घट]
8.शरीर।
  • उदा.--1..घड़ रत वहै गाव कर घूमै।--सू.प्र.
  • उदा.--2..लोही घड़ वहि वहि फळ लोहां, घड़ गहि गहि ऊठंत छछोहां।--सू.प्र.


नोट: पद्मश्री डॉ. सीताराम लालस संकलित वृहत राजस्थानी सबदकोश मे आपका स्वागत है। सागर-मंथन जैसे इस विशाल कार्य मे कंप्युटर द्वारा ऑटोमैशन के फलस्वरूप आई गलतियों को सुधारने के क्रम मे आपका अमूल्य सहयोग होगा कि यदि आपको कोई शब्द विशेष नहीं मिले अथवा उनके अर्थ गलत मिलें या अनैक अर्थ आपस मे जुड़े हुए मिलें तो कृपया admin@charans.org पर ईमेल द्वारा सूचित करें। हार्दिक आभार।






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