वांछित शब्द लिख कर सर्च बटन क्लिक करें
अंत्यानुप्रास ढूंढें
चतर
शब्दभेद/रूपभेद
व्युत्पत्ति
शब्दार्थ एवं प्रयोग
वि.
चतुर।
उदा.--
साजण विसराया भला सुमर्यां करै बेहाल, देखो
चतर
विचार के साची कहै जमाल।--जमाल
कहावत--
1.चतर नै इसारौ घणौ--होशियार आदमी को इशारा मात्र काफी होता है। भले या समझदार आदमी को संकेत मात्र काफी होता है।
कहावत--
2.चतर री चार घड़ी मूरख रौ जमारौ--चतुर या दक्ष व्यक्ति को किसी कार्य के लिए बहुत थोड़ा समय काफी होता है परन्तु मूर्ख तो जिन्दगी भर नहीं कर सकता।
कहावत--
3.चतर री एक पो'र मूरख री सारी रात--देखो कहा.2।
1.चतुर व्यक्ति।
उदा.--
सठ सनेह जीरण वसन, जतन करंतां जाय।
चतर
प्रीत रेसम लछा, घुळत घुळत घुळ जाय।--र.रा.
2.ब्रह्मा।
सं.पु.--
नोट:
पद्मश्री डॉ. सीताराम लालस संकलित वृहत राजस्थानी सबदकोश मे आपका स्वागत है। सागर-मंथन जैसे इस विशाल कार्य मे कंप्युटर द्वारा ऑटोमैशन के फलस्वरूप आई गलतियों को सुधारने के क्रम मे आपका अमूल्य सहयोग होगा कि यदि आपको कोई शब्द विशेष नहीं मिले अथवा उनके अर्थ गलत मिलें या अनैक अर्थ आपस मे जुड़े हुए मिलें तो कृपया admin@charans.org पर ईमेल द्वारा सूचित करें। हार्दिक आभार।
राजस्थानी भाषा, व्याकरण एवं इतिहास
Project
|
About Us
|
Contact Us
|
Feedback
|
Donate
|
संक्षेपाक्षर सूची