सं.स्त्री.
सं.
1.सत्ताइस नक्षत्रों में चौदहवां नक्षत्र (अ.मा.)
5.संगीत में एक मूर्छना का नाम (सू.प्र.) सं.पु.--
6.प्राचीन काल का एक बाजा जिसमें तार लगे रहते हैं।
8.एक प्रकार का छंद जो चौपाई का एक भेद है। इसके प्रत्येक चरण में सोलह मात्राएँ होती हैं और अंत में एक गुरु होता है। इसकी पांचवीं, आठवीं और नवीं मात्रा लघु होती है।