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चित्रा  
शब्दभेद/रूपभेद
व्युत्पत्ति
शब्दार्थ एवं प्रयोग
सं.स्त्री.
सं.
1.सत्ताइस नक्षत्रों में चौदहवां नक्षत्र (अ.मा.)
2.चितकबरी गाय।
3.एक नदी का नाम।
4.एक अप्सरा का नाम।
5.संगीत में एक मूर्छना का नाम (सू.प्र.) सं.पु.--
6.प्राचीन काल का एक बाजा जिसमें तार लगे रहते हैं।
7.एक सर्प का नाम।
8.एक प्रकार का छंद जो चौपाई का एक भेद है। इसके प्रत्येक चरण में सोलह मात्राएँ होती हैं और अंत में एक गुरु होता है। इसकी पांचवीं, आठवीं और नवीं मात्रा लघु होती है।


नोट: पद्मश्री डॉ. सीताराम लालस संकलित वृहत राजस्थानी सबदकोश मे आपका स्वागत है। सागर-मंथन जैसे इस विशाल कार्य मे कंप्युटर द्वारा ऑटोमैशन के फलस्वरूप आई गलतियों को सुधारने के क्रम मे आपका अमूल्य सहयोग होगा कि यदि आपको कोई शब्द विशेष नहीं मिले अथवा उनके अर्थ गलत मिलें या अनैक अर्थ आपस मे जुड़े हुए मिलें तो कृपया admin@charans.org पर ईमेल द्वारा सूचित करें। हार्दिक आभार।






राजस्थानी भाषा, व्याकरण एवं इतिहास

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