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जमीन  
शब्दभेद/रूपभेद
व्युत्पत्ति
शब्दार्थ एवं प्रयोग
सं.स्त्री.
फा.ज़मीन
1.पृथ्वी, भूमि, धरती.
2.पृथ्वी की ऊपरी सतह।
  • मुहावरा--1.जमीन आसमांन एक करणौ--किसी कार्य के लिये बहुत अधिक परिश्रम करना.
  • मुहावरा--2.जमीन आसमांन रौ फरक होणौ--बहुत अधिक फर्क होना.
  • मुहावरा--3.जमीन चाटणी--नीचा देखना, इस प्रकार गिर पड़ना कि जमीन के साथ मुँह लग जाय.
  • मुहावरा--4.जमीन पड़ियौ आसमांन चाटणौ--जमीन पर रह कर आसमान की बातें करना, बढ़-बढ़ कर बातें मारना, बहुत महत्त्वपूर्ण एवं कठिन कार्य करना.
  • मुहावरा--5.जमीन माथै पग ही नी धरणौ--बहुत अभिमान करना, बहुत इतराना.
  • मुहावरा--6.जमीन माथै पग ही न पड़णौ--बहुत गर्व होना.
  • मुहावरा--7.जमीन में गड (समा) जाणौ--बहुत लज्जित होना.
  • मुहावरा--8.पगां नीचै सूं जमीन खिसकणी--होस हवास जाता रहना, सन्नाटे में आना।
3.कपड़े, कागज आदि की ऊपरी सतह।
रू.भे.
जमीं, जमी, जम्मी।


नोट: पद्मश्री डॉ. सीताराम लालस संकलित वृहत राजस्थानी सबदकोश मे आपका स्वागत है। सागर-मंथन जैसे इस विशाल कार्य मे कंप्युटर द्वारा ऑटोमैशन के फलस्वरूप आई गलतियों को सुधारने के क्रम मे आपका अमूल्य सहयोग होगा कि यदि आपको कोई शब्द विशेष नहीं मिले अथवा उनके अर्थ गलत मिलें या अनैक अर्थ आपस मे जुड़े हुए मिलें तो कृपया admin@charans.org पर ईमेल द्वारा सूचित करें। हार्दिक आभार।






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