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जागरी  
शब्दभेद/रूपभेद
व्युत्पत्ति
शब्दार्थ एवं प्रयोग
सं.पु.
सं.
एक जाति विशेष जो मूलतः कृषक एवं मजदूर वर्ग से संबंधित है। ऐतिहासिक रूप से यह वर्ग सामाजिक परिस्थितियों के कारण राजपूत समाज से अलग हुआ था, और समय के साथ स्वतंत्र जातीय पहचान के रूप में स्थापित हुआ। [मूल शब्दकोश मे लिखे अंश को संशोधित किया गया]


नोट: पद्मश्री डॉ. सीताराम लालस संकलित वृहत राजस्थानी सबदकोश मे आपका स्वागत है। सागर-मंथन जैसे इस विशाल कार्य मे कंप्युटर द्वारा ऑटोमैशन के फलस्वरूप आई गलतियों को सुधारने के क्रम मे आपका अमूल्य सहयोग होगा कि यदि आपको कोई शब्द विशेष नहीं मिले अथवा उनके अर्थ गलत मिलें या अनैक अर्थ आपस मे जुड़े हुए मिलें तो कृपया admin@charans.org पर ईमेल द्वारा सूचित करें। हार्दिक आभार।






राजस्थानी भाषा, व्याकरण एवं इतिहास

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