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झट
शब्दभेद/रूपभेद
व्युत्पत्ति
शब्दार्थ एवं प्रयोग
क्रि.वि.
सं.झटिति
1.उसी समय, तत्काल, तत्क्षण, फौरन, तुरन्त।
उदा.--
हर अकरण करण सरण असरण हरी, तरण अतर भव जळधि तिकौ। कट कट अघ दुघट विकट्ट थट अणघट,
झट झट
रट रट 'किसन' जिकौ।--र.ज.प्र.
मुहावरा--
झट से--शीघ्रतापूर्वक, जल्दी से।
यौ.
झटपट। सं.स्त्री.--
1.देखो 'झाट' (रू.भे.)
उदा.--
1..असुरां थट 'देव' क्रनोत अड़ै। लोहड़ां
झट
'सूरिजमाल' लड़ै। 'अणदेस' सुजाव लड़ै उरड़ै। जवनां 'सगतेस' छड़ाळ जड़ै।--सू.प्र.
उदा.--
2..घणा खळ पाड़ि पड़ै घमसांण। वरै बिहुवै रंभ बैसि विमांण। पिता जिम खाग
झटां
म्रत पाय। किया स्रुगि वास सुजस्स कहाय।--सू.प्र.
2.वेग (अ.मा.)
रू.भे.
झटत, झटति, झटती, झट्ट।
नोट:
पद्मश्री डॉ. सीताराम लालस संकलित वृहत राजस्थानी सबदकोश मे आपका स्वागत है। सागर-मंथन जैसे इस विशाल कार्य मे कंप्युटर द्वारा ऑटोमैशन के फलस्वरूप आई गलतियों को सुधारने के क्रम मे आपका अमूल्य सहयोग होगा कि यदि आपको कोई शब्द विशेष नहीं मिले अथवा उनके अर्थ गलत मिलें या अनैक अर्थ आपस मे जुड़े हुए मिलें तो कृपया admin@charans.org पर ईमेल द्वारा सूचित करें। हार्दिक आभार।
राजस्थानी भाषा, व्याकरण एवं इतिहास
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