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टोपी  
शब्दभेद/रूपभेद
व्युत्पत्ति
शब्दार्थ एवं प्रयोग
सं.स्त्री.
सिर ढाँकने का आच्छादन, छोटा टोपा। क्रि.प्र.--उतारणी, पटकणी, पै'रणी, पै'राणी, फेंकणी, मेलणी, राखणी।
  • मुहावरा--1.टोपी उतारणी--बेइज्जत करना, कंगाल करना.
  • मुहावरा--2.टोपी पटकणी--बहुत प्रयत्न करना.
  • मुहावरा--3.टोपी पहन लेना, संन्यास ले लेना.
  • मुहावरा--4.टोपी पै'राणी--निर्धन कर देना, फकीर बना देना.
  • मुहावरा--5.टोपी फेंकणी--उत्तरदायित्व छोड़ देना, जिम्मेवारी से दूर हो जाना.
  • मुहावरा--6.टोपी राखणी--इज्जत रखना, प्रतिष्ठा रखना.
2.अनाज के ऊपर का छिलका। क्रि.प्र.--उतारणी।
3.गोल आकार की कटोरीनुमा वस्तु, ढक्कन आदि। क्रि.प्र.--लगाणी।
4.बंदूक छोड़ने के लिए धातु की बनी वस्तु, पटाखा। क्रि.प्र.--चडाणी, चाढ़णी।
यौ.
टोपीदार।
5.लिंग का अग्रभाग.
6.विष्णु मूर्ति का शिर का आभूषण.
अल्पा.
टोपली। मह.--टोप।


नोट: पद्मश्री डॉ. सीताराम लालस संकलित वृहत राजस्थानी सबदकोश मे आपका स्वागत है। सागर-मंथन जैसे इस विशाल कार्य मे कंप्युटर द्वारा ऑटोमैशन के फलस्वरूप आई गलतियों को सुधारने के क्रम मे आपका अमूल्य सहयोग होगा कि यदि आपको कोई शब्द विशेष नहीं मिले अथवा उनके अर्थ गलत मिलें या अनैक अर्थ आपस मे जुड़े हुए मिलें तो कृपया admin@charans.org पर ईमेल द्वारा सूचित करें। हार्दिक आभार।






राजस्थानी भाषा, व्याकरण एवं इतिहास

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