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डर  
शब्दभेद/रूपभेद
व्युत्पत्ति
शब्दार्थ एवं प्रयोग
सं.पु.
सं.दर:
1.किसी अनिष्ट या हानि की आशंका से उत्पन्न होने वाला एक दु:खपूर्ण मनोवेग, भय, खौफ, त्रास (ह.नां.) पर्या.--अंतक, आतंक, आसंक्या, उद्रक, चमक, त्राप, त्रास, दर, बी, बीहं, भय, भी, भीत, भीय, भै। क्रि.प्र.--लागणौ, होणौ।
  • मुहावरा--1.डर राखणौ--शंका रखना, भय रखना, बड़े-बूढ़ों का मान रखने के लिये उनके नियंत्रण में रहना, संकोच रखना.
  • मुहावरा--2.डर रौ मारियौ--भय के कारण।
2.किसी अनिष्ट की आशंका।
  • उदा.--सबळ जळ सभिन्न सुगंध भेट सजि, डिगमिगी पाउ वाउ क्रोध डर। हालियौ मळयाचळ हूंत हिमाचळ, कांमदूत हर प्रसन्न कर।--वेलि.
यौ.
डरूं-फरूं।
3.ध्वनि विशेष।
  • उदा.--डबक डाळियां डुळै, डागड़्‌या डर-डर सूंतै। ऊँची नीची तकै, लखै लुळ पूरी कूंतै।--दसदेव
4.मेंढ़क के बोलने की ध्वनि।
  • उदा.--डेडरिया करै (बोलै) डरां-डरां, खाली कोठा भरां-भरां।--अज्ञात
रू.भे.
टर।
यौ.
डर-डर, डरां-डरां। वि.--सघन, गहरा, काला।
  • उदा.--दीह गयउ डर डंबरे, नीले नीझरणेहि। काळी जाया करहला, बोल्यउ किसे गुणेहि।--ढो.मा.


नोट: पद्मश्री डॉ. सीताराम लालस संकलित वृहत राजस्थानी सबदकोश मे आपका स्वागत है। सागर-मंथन जैसे इस विशाल कार्य मे कंप्युटर द्वारा ऑटोमैशन के फलस्वरूप आई गलतियों को सुधारने के क्रम मे आपका अमूल्य सहयोग होगा कि यदि आपको कोई शब्द विशेष नहीं मिले अथवा उनके अर्थ गलत मिलें या अनैक अर्थ आपस मे जुड़े हुए मिलें तो कृपया admin@charans.org पर ईमेल द्वारा सूचित करें। हार्दिक आभार।






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