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तीर  
शब्दभेद/रूपभेद
व्युत्पत्ति
शब्दार्थ एवं प्रयोग
सं.पु.
सं.तीरं
1.जलाशय अथवा नदी आदि का किनारा, तट।
  • उदा.--अधम न जा तीरथ अवर, तु जा सुरसरी तीर। दीरघ लहसी तीन द्रग, सुजळ पखाळ सरीर।--बां.दा.
  • मुहावरा--1.तीर उतरणौ--तीर जाना, पार उतरना, किनारे पर पहुँचना, भव सागर पार होना.
  • मुहावरा--2.तीर उतारणौ--पार करना, किसी का उद्वार करना, भव सागर पार कराना.
  • मुहावरा--3.तीर मेलणौ--किसी वस्तु को दूसरे किनारे रखना अर्थात्‌ दूर रखना.
  • मुहावरा--4.तीर होणौ--पार होना।
2.बाण, शर (डिं.को.) पर्या.--अलख, अजिहमग, आसुग, कंकपत्र, करडंड, कलंब, कांड, खंगाळ, खंड, खग, खुहम, ग्रीधपंख, चित्रपूख, तुक्कौ, तोमर, नाराच, निखद्द, नीरस्त, पंखाळ, पंखी, पत्रवाह, पत्री, प्रखतक, प्रदर, बांण, बिसिख, मारगण, म्रगणाल, इखु, रोप, रोपण, सर, सायक, सिलीमुख।
  • मुहावरा--1.तीर करणौ--तीर करना, गायब करना, उड़ा लेना, (किसी को) भगा देना.
  • मुहावरा--2.तीर चलाणौ--तीर चलाना, युक्ति लगाना, दांव फेंकना, वार करना.
  • मुहावरा--3.तीर ठिकांणै बैठणौ--लक्ष्य पर वार होना.
  • मुहावरा--4.तीर फेंकणौ, तीर बावणौ--देखो 'तीर चलाणौ'
  • मुहावरा--5.तीर लागणौ--ठेस पहुँचाना, ताना सुनाना.
  • मुहावरा--6.तीर होणौ--तीर होना, भाग निकलना।
यौ.
तीरकस, तीरगर, तीरबार।
3.बंदूक की नाल का वह छेद जिसमें बारूद और गोली आदि डालते हैं.
4.सीसा नामक एक धातु।
  • उदा.--आधा पाव तीर धमाक छाती चाढ़ आयौ।--कवि महकरण महियारियौ
5.जहाज का मस्तूल.
6.रहँट के चक्र के बीच में खड़े रहने वाले काष्ठ के लट्ठे का नीचे का नुकीला भाग।--अल्पा.तीरियौ। मह.--तीरौ। क्रि.वि.--पास, निकट, समीप।
  • उदा.--भाव सहित सेवा करूं, रहूं जिणां रै तीर।--जयवांणी
(फा.)


नोट: पद्मश्री डॉ. सीताराम लालस संकलित वृहत राजस्थानी सबदकोश मे आपका स्वागत है। सागर-मंथन जैसे इस विशाल कार्य मे कंप्युटर द्वारा ऑटोमैशन के फलस्वरूप आई गलतियों को सुधारने के क्रम मे आपका अमूल्य सहयोग होगा कि यदि आपको कोई शब्द विशेष नहीं मिले अथवा उनके अर्थ गलत मिलें या अनैक अर्थ आपस मे जुड़े हुए मिलें तो कृपया admin@charans.org पर ईमेल द्वारा सूचित करें। हार्दिक आभार।






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