सं.पु.
राजस्थान में जाटों, गूजरों आदि द्वारा विशेष रूप से पूजा जाने वाला एक जूझार। वि.वि.--तेजा का जन्म राजस्थान के नागौर परगने के 'खड़नाळ' नामक ग्राम में हुआ था। इसके पिता का नाम 'बखतौ' और माता का नाम 'लछमा' था। राजस्थान के जाटों में यह एक परोपकार-परायण, प्रतिज्ञापालक, सत्यनिष्ठ जुझार हुआ है। इसका विवाह किशनगढ़ राज्य के 'पनेर'गांव में हुआ था। यह अपनी पत्नी को लेने ससुराल गया हुआ था। वहाँ गूजरों की गायें मेर जाति के लोग घेर कर ले गए। गूजरों की प्रार्थना पर 'तेजा' ने मेरों का पीछा किया और उनसे युद्ध कर के गायों को छुड़ाने में सफल हुआ। युद्ध में यह बहुत घायल हो गया था, उसी दशा में एक सर्प के काटने से इसकी मृत्यु हो गई। 'तेजा' की स्त्री उसके साथ सती हुई। गांव वालों ने तेजा की 'देवली' बना कर पूजना शुरू कर दिया। आज भी उसकी मृत्यु तिथि भादसा सुदी 10 को परबतसर में एक बहुत बड़ा मेला लगता है जिसमें लोग अपने पशुओं को साथ ले जाते हैं और वहाँ उनका क्रय-विक्रय होता है.
2.'तेजा' से सम्बन्धित राजस्थान में गाया जाने वाला एक लोक गीत।