HyperLink
वांछित शब्द लिख कर सर्च बटन क्लिक करें
 

तेजौ  
शब्दभेद/रूपभेद
व्युत्पत्ति
शब्दार्थ एवं प्रयोग
सं.पु.
राजस्थान में जाटों, गूजरों आदि द्वारा विशेष रूप से पूजा जाने वाला एक जूझार। वि.वि.--तेजा का जन्म राजस्थान के नागौर परगने के 'खड़नाळ' नामक ग्राम में हुआ था। इसके पिता का नाम 'बखतौ' और माता का नाम 'लछमा' था। राजस्थान के जाटों में यह एक परोपकार-परायण, प्रतिज्ञापालक, सत्यनिष्ठ जुझार हुआ है। इसका विवाह किशनगढ़ राज्य के 'पनेर'गांव में हुआ था। यह अपनी पत्नी को लेने ससुराल गया हुआ था। वहाँ गूजरों की गायें मेर जाति के लोग घेर कर ले गए। गूजरों की प्रार्थना पर 'तेजा' ने मेरों का पीछा किया और उनसे युद्ध कर के गायों को छुड़ाने में सफल हुआ। युद्ध में यह बहुत घायल हो गया था, उसी दशा में एक सर्प के काटने से इसकी मृत्यु हो गई। 'तेजा' की स्त्री उसके साथ सती हुई। गांव वालों ने तेजा की 'देवली' बना कर पूजना शुरू कर दिया। आज भी उसकी मृत्यु तिथि भादसा सुदी 10 को परबतसर में एक बहुत बड़ा मेला लगता है जिसमें लोग अपने पशुओं को साथ ले जाते हैं और वहाँ उनका क्रय-विक्रय होता है.
2.'तेजा' से सम्बन्धित राजस्थान में गाया जाने वाला एक लोक गीत।
यौ.
तेजौ-धोळौ।


नोट: पद्मश्री डॉ. सीताराम लालस संकलित वृहत राजस्थानी सबदकोश मे आपका स्वागत है। सागर-मंथन जैसे इस विशाल कार्य मे कंप्युटर द्वारा ऑटोमैशन के फलस्वरूप आई गलतियों को सुधारने के क्रम मे आपका अमूल्य सहयोग होगा कि यदि आपको कोई शब्द विशेष नहीं मिले अथवा उनके अर्थ गलत मिलें या अनैक अर्थ आपस मे जुड़े हुए मिलें तो कृपया admin@charans.org पर ईमेल द्वारा सूचित करें। हार्दिक आभार।






राजस्थानी भाषा, व्याकरण एवं इतिहास

Project | About Us | Contact Us | Feedback | Donate | संक्षेपाक्षर सूची