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तेली     (स्त्रीलिंग--तेलण)  
शब्दभेद/रूपभेद
व्युत्पत्ति
शब्दार्थ एवं प्रयोग
सं.पु.
सं.तैलिक:
सरसों, तिल आदि पेर कर तेल निकालने का व्यवसाय करने वाली जाति तथा इस जाति का व्यक्ति। वि.वि.--राजस्थान में तेल पेरने का व्यवसाय हिन्दू व मुसलमान दोनों जाति के लोग करते हैं। अत: तेल पेरने का व्यवसाय करने वाली मुसलमान जाति को तेली या हिन्दुओं को घांची भी कहते हैं। व्यवसाय के हिसाब से इनमें कोई अंतर नहीं है, केवल धर्म का अन्तर है।
यौ.
तेली-तंबोळी, तेलीवाड़ौ।


नोट: पद्मश्री डॉ. सीताराम लालस संकलित वृहत राजस्थानी सबदकोश मे आपका स्वागत है। सागर-मंथन जैसे इस विशाल कार्य मे कंप्युटर द्वारा ऑटोमैशन के फलस्वरूप आई गलतियों को सुधारने के क्रम मे आपका अमूल्य सहयोग होगा कि यदि आपको कोई शब्द विशेष नहीं मिले अथवा उनके अर्थ गलत मिलें या अनैक अर्थ आपस मे जुड़े हुए मिलें तो कृपया admin@charans.org पर ईमेल द्वारा सूचित करें। हार्दिक आभार।






राजस्थानी भाषा, व्याकरण एवं इतिहास

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