सं.पु.
सं.
तीनों लोक--स्वर्ग, पृथ्वी, पाताल।
- उदा.--1..देवी गाजता दैत ता वंस गमिया। देवी नवे खंड त्रिभुवन तूझ नमिया।--देवि.
- उदा.--2..आयौ अस खेड़ि अरि सेन अतरै, प्रथिमी गति आकास पथ। त्रिभुवननाथ तणौ वेळा तिणि, रव सभळी कि दीठ रथ।--वेलि.
रू.भे.
तिभवण, त्रभवण, त्रभवन, त्रभुयण, त्रिभवणा, त्रिभुअण, त्रिभुवण, त्रिभुवन्न, त्रिभोयण, त्रिभोवण, त्रेभवण, त्रंभुयण, त्रंभुवण, त्रेभायण।
यौ.
त्रिभुवणभूप, विभु-वनधणी, त्रिभुवननाथ, त्रिभुवनपति, त्रिभुवनराय, त्रिभुवनसुंदरी, त्रिभुवनस्वांमी।