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थैली  
शब्दभेद/रूपभेद
व्युत्पत्ति
शब्दार्थ एवं प्रयोग
सं.स्त्री.
सं.स्थल=कपड़े का घर
1.कपड़े, टाट आदि को सी कर बनाया हुआ पात्र जिसमें सामान भरा जाता है।
  • उदा.--ऊजळा दही व्है जिसा कपड़ां में फूटरी-फूटरी गुजरातणियां अर हाथां में थैलियां लियोड़ा ग्राहक सब एक साथै इज वाड़ा मांयनै सूं बकरियां निकळी व्है ज्यूं परभात में इज निकळ गया हा।--रातवासौ,
2.रुपये डालने का कपड़े आदि का बना पात्र, तोड़ा।
3.कागज या कपड़े की बनी पत्र डालने की थैली, लिफाफा।
  • उदा.--इण भांत पत्र लिख थैली में मेल्ह लाखोटौ कर प्रोहित नूं सांपियौ, प्रोहित पत्र लेय बाहिर हुऔ।--कुंवरसी सांखला री वारता
रू.भे.
थेली, थैई।
अल्पा.
थेलकी, थैलकी। मह.--थेलीड़, थैलीड़।


नोट: पद्मश्री डॉ. सीताराम लालस संकलित वृहत राजस्थानी सबदकोश मे आपका स्वागत है। सागर-मंथन जैसे इस विशाल कार्य मे कंप्युटर द्वारा ऑटोमैशन के फलस्वरूप आई गलतियों को सुधारने के क्रम मे आपका अमूल्य सहयोग होगा कि यदि आपको कोई शब्द विशेष नहीं मिले अथवा उनके अर्थ गलत मिलें या अनैक अर्थ आपस मे जुड़े हुए मिलें तो कृपया admin@charans.org पर ईमेल द्वारा सूचित करें। हार्दिक आभार।






राजस्थानी भाषा, व्याकरण एवं इतिहास

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