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दक्ष  
शब्दभेद/रूपभेद
व्युत्पत्ति
शब्दार्थ एवं प्रयोग
सं.पु.
सं.दक्ष
एक प्रजापति का नाम जिस से देवता उत्पन्न हुए थे। वि.वि.--इसकी कन्याओं में एक सती भी थी जो रुद्र को ब्याही गई थी। दक्ष ने एक बहुत बड़ा यज्ञ किया जिस में सती और रुद्र को नहीं बुलाया। सती बिना बुलाए ही अपने पिता के यहां यज्ञ देखने चली गई। वहां पर अपमानित हो कर उसने अपना शरीर त्याग दिया। रुद्र ने क्रोधित हो कर वीरभद्र को पैदा कर के दक्ष का यज्ञ विध्वंश करवा दिया और उसे शाप दे कर मनुष्य योनि में भेज दिया।
  • उदा.--जिम करूं वीरभद्र दक्ष जग्यन, कचरघांण किलमांण रौ। इम 'अभा' हूंत मिसलति अरज, रटै 'पतौ' महिरांण' रौ।--सू.प्र.वि.
1.निपुण, कुशल, चतुर, होशियार,
2.दाहिना, दक्षिण।
रू.भे.
दक्ख, दख, दखि, दख्यण, दच्छ, दछ, दछि, दिख।
(सं.)


नोट: पद्मश्री डॉ. सीताराम लालस संकलित वृहत राजस्थानी सबदकोश मे आपका स्वागत है। सागर-मंथन जैसे इस विशाल कार्य मे कंप्युटर द्वारा ऑटोमैशन के फलस्वरूप आई गलतियों को सुधारने के क्रम मे आपका अमूल्य सहयोग होगा कि यदि आपको कोई शब्द विशेष नहीं मिले अथवा उनके अर्थ गलत मिलें या अनैक अर्थ आपस मे जुड़े हुए मिलें तो कृपया admin@charans.org पर ईमेल द्वारा सूचित करें। हार्दिक आभार।






राजस्थानी भाषा, व्याकरण एवं इतिहास

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