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दाट  
शब्दभेद/रूपभेद
व्युत्पत्ति
शब्दार्थ एवं प्रयोग
सं.पु.
सं.दान्ति:
1.बोतल इत्यादि का मुंह बन्द करने की वस्तु, कॉर्क, डाट.
2.प्रतिबंध, रोक.
  • उदा.--नवरंग कटाच्छ रस न्रत, जंग जंग वाजिय जगत। ह्वैरमिय उरप तुरपंग हद, लाग दाट त्रेवट लगत।
4.नाश, ध्वंस।
  • उदा.--1..पड़ झाट थाट छळराट पाट, दिल्लीस जळै दळ वळै दाट।--रा.रू.
  • उदा.--2..खग--झाट मुंह वह थाट--खेसण, वाट--दह अवियाट। भिड़ घाट घाय रिम--घड़ा भांजण, द्रुयण वाळण दाट।--नैणसी
5.फटकार.
6.देखो 'डाट' (रू.भे.)
  • उदा.--उचार काट अन्य बाट वेद बाट में बहे, निराठ दाट घाट की नही सम्राट की सहे।--ऊ.का.
क्रि.प्र.--वाळणी।


नोट: पद्मश्री डॉ. सीताराम लालस संकलित वृहत राजस्थानी सबदकोश मे आपका स्वागत है। सागर-मंथन जैसे इस विशाल कार्य मे कंप्युटर द्वारा ऑटोमैशन के फलस्वरूप आई गलतियों को सुधारने के क्रम मे आपका अमूल्य सहयोग होगा कि यदि आपको कोई शब्द विशेष नहीं मिले अथवा उनके अर्थ गलत मिलें या अनैक अर्थ आपस मे जुड़े हुए मिलें तो कृपया admin@charans.org पर ईमेल द्वारा सूचित करें। हार्दिक आभार।






राजस्थानी भाषा, व्याकरण एवं इतिहास

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