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दोयण
शब्दभेद/रूपभेद
व्युत्पत्ति
शब्दार्थ एवं प्रयोग
सं.पु.
सं.दुर्जन
1.राक्षस, दानव.
2.देखो 'दुरजण' (रू.भे.)
उदा.--
1..फौजां देख न कीधी फौजां,
दोयण
कियां न खळा डळा। खवां खांच चूड़ै खावंद रै, उण हिज चूड़ै गई यळा।--बां.दा.
उदा.--
दोयण
, रमणीय, कवेसुर, दासां, जज्र, समर, सुरतर, निज जोत। अवध भूप दरसै तौ आळां, अवनी मोहै रूप उद्योत।--र.रू.
नोट:
पद्मश्री डॉ. सीताराम लालस संकलित वृहत राजस्थानी सबदकोश मे आपका स्वागत है। सागर-मंथन जैसे इस विशाल कार्य मे कंप्युटर द्वारा ऑटोमैशन के फलस्वरूप आई गलतियों को सुधारने के क्रम मे आपका अमूल्य सहयोग होगा कि यदि आपको कोई शब्द विशेष नहीं मिले अथवा उनके अर्थ गलत मिलें या अनैक अर्थ आपस मे जुड़े हुए मिलें तो कृपया admin@charans.org पर ईमेल द्वारा सूचित करें। हार्दिक आभार।
राजस्थानी भाषा, व्याकरण एवं इतिहास
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