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धूसर  
शब्दभेद/रूपभेद
व्युत्पत्ति
शब्दार्थ एवं प्रयोग
वि.
सं.
1.मटमैले रंग का, धूल के रंग का।
  • उदा.--मेटिया केइक पीळा पमंग। सोनरे कइक धूसर सुरंग।--पे.रू.
2.जिसमें धूल लिपटी हो, धूल से भरा, धूल लगा हुआ।
  • उदा.--तोय झरणि छंटि ऊधसत मळय तरि अति पराग रज धूसर अंग। मधु मद स्रवति मंद गति मल्हपति मदनोमत्त मारुत मातंग।--वेलि.
3.जो धुंधला हो।
  • उदा.--ऊसर बैणां सूं व्रवती अळ आरां। धूसर नैणां सूं ध्रवती जळ धारां।--ऊ.का.
1.मटमैला रंग, भूरा रंग.(सं.धूसर:)
2.धूसर रंग का घोड़ा.
3.तेली (डिं.को.) (मह.धूसरड़)
सं.पु.(सं.धूसर:)


नोट: पद्मश्री डॉ. सीताराम लालस संकलित वृहत राजस्थानी सबदकोश मे आपका स्वागत है। सागर-मंथन जैसे इस विशाल कार्य मे कंप्युटर द्वारा ऑटोमैशन के फलस्वरूप आई गलतियों को सुधारने के क्रम मे आपका अमूल्य सहयोग होगा कि यदि आपको कोई शब्द विशेष नहीं मिले अथवा उनके अर्थ गलत मिलें या अनैक अर्थ आपस मे जुड़े हुए मिलें तो कृपया admin@charans.org पर ईमेल द्वारा सूचित करें। हार्दिक आभार।






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