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धड़ी  
शब्दभेद/रूपभेद
व्युत्पत्ति
शब्दार्थ एवं प्रयोग
सं.स्त्री.
देश.
1.स्त्रियों के कान का एक आभूषण विशेष।
  • उदा.--कांनां नै धड़ियां लाय भंवर म्हारै कांनां नै धड़ियां लाय। हो जी म्हारा झूटणां हीरां जड़ाय भंवर म्हांनै खेलण दौ गिरगोर।--लो.गी.
2.चार या पाँच सेर की एक तौल, मतांतर से ढाई सेरकी एक तौल।
  • उदा.--मूंघौ मांखण सूं मिसरी सूं मीठौ। द्रग सूं दो धड़ियां अन बिकतौ दीठौ।--ऊ.का.
यौ.
धोखा--धड़ी।
3.रेखा, लकीर।


नोट: पद्मश्री डॉ. सीताराम लालस संकलित वृहत राजस्थानी सबदकोश मे आपका स्वागत है। सागर-मंथन जैसे इस विशाल कार्य मे कंप्युटर द्वारा ऑटोमैशन के फलस्वरूप आई गलतियों को सुधारने के क्रम मे आपका अमूल्य सहयोग होगा कि यदि आपको कोई शब्द विशेष नहीं मिले अथवा उनके अर्थ गलत मिलें या अनैक अर्थ आपस मे जुड़े हुए मिलें तो कृपया admin@charans.org पर ईमेल द्वारा सूचित करें। हार्दिक आभार।






राजस्थानी भाषा, व्याकरण एवं इतिहास

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