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नकल  
शब्दभेद/रूपभेद
व्युत्पत्ति
शब्दार्थ एवं प्रयोग
सं.स्त्री.
अ.
1.मूल वस्तु को देख कर उसके अनुसार बनाई हुई।
  • उदा.--असल सूं नकल मींढौ असल, गुरगम हींणां गम नहीं। अमलियां हूंत देखो अपत, हूका वाळा कम नहीं।--ऊ.का.
2.अनुकरण लेख आदि की अक्षरश: प्रतिलिपि.
3.स्वांग.
4.अद्‌भुत और हास्यजनक आकृति.
4.मजाक। जैसे--क्यूं नकलां करौ हौ, बुझापौ तौ थांरौ भी आवैला। क्रि.प्र.--उतरणी, उतारणी, करणी, करावणी, बणणी, बणावणी, मारणी, होवणी।
6.नकल बही।


नोट: पद्मश्री डॉ. सीताराम लालस संकलित वृहत राजस्थानी सबदकोश मे आपका स्वागत है। सागर-मंथन जैसे इस विशाल कार्य मे कंप्युटर द्वारा ऑटोमैशन के फलस्वरूप आई गलतियों को सुधारने के क्रम मे आपका अमूल्य सहयोग होगा कि यदि आपको कोई शब्द विशेष नहीं मिले अथवा उनके अर्थ गलत मिलें या अनैक अर्थ आपस मे जुड़े हुए मिलें तो कृपया admin@charans.org पर ईमेल द्वारा सूचित करें। हार्दिक आभार।






राजस्थानी भाषा, व्याकरण एवं इतिहास

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