सं.स्त्री.
अ.
1.मूल वस्तु को देख कर उसके अनुसार बनाई हुई।
- उदा.--असल सूं नकल मींढौ असल, गुरगम हींणां गम नहीं। अमलियां हूंत देखो अपत, हूका वाळा कम नहीं।--ऊ.का.
2.अनुकरण लेख आदि की अक्षरश: प्रतिलिपि.
4.अद्भुत और हास्यजनक आकृति.
4.मजाक। जैसे--क्यूं नकलां करौ हौ, बुझापौ तौ थांरौ भी आवैला। क्रि.प्र.--उतरणी, उतारणी, करणी, करावणी, बणणी, बणावणी, मारणी, होवणी।