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नथ  
शब्दभेद/रूपभेद
व्युत्पत्ति
शब्दार्थ एवं प्रयोग
सं.स्त्री.
सं.नाथ
1.नाक में छेद कर पहना जाने वाला स्त्रियों का आभूषण। वि.वि.--सौभाग्यवती स्त्रिएँ इस आभूषण को धारण कर के नाथ (पति) का अस्तित्व सूचित करती हैं अत: नाथ से नथ शब्द बना।
  • उदा.--1..गाढा बीसां री घड़ाई नथ लुळ लुळ जाय। तीसां री पोवाई नथ ड्‌योढ़ा झोला खाय।--लो.गी.
  • उदा.--2..उत्तर जाइज्यौ दिक्खण जाइज्यौ जाइज्यौ समदां पार। मारवणी रे नथ लाइजौ मोती लाइजौ चार।--लो.गी.
2.तलवार की मूठ पर लगा हुआ छल्ला.
3.बेचने की क्रिया।
  • मुहावरा--नथ उतारणी--किसी वेश्या का प्रथम समागम कराना, कौमार्य-भंग करना।
रू.भे.
नत्थ, नाथ।
अल्पा.
नथकी, नथड़की, नथड़ली, नथड़ी, नथणी, नथली, नथुली। मह.--नत्थड़, नथड़।


नोट: पद्मश्री डॉ. सीताराम लालस संकलित वृहत राजस्थानी सबदकोश मे आपका स्वागत है। सागर-मंथन जैसे इस विशाल कार्य मे कंप्युटर द्वारा ऑटोमैशन के फलस्वरूप आई गलतियों को सुधारने के क्रम मे आपका अमूल्य सहयोग होगा कि यदि आपको कोई शब्द विशेष नहीं मिले अथवा उनके अर्थ गलत मिलें या अनैक अर्थ आपस मे जुड़े हुए मिलें तो कृपया admin@charans.org पर ईमेल द्वारा सूचित करें। हार्दिक आभार।






राजस्थानी भाषा, व्याकरण एवं इतिहास

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