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ननु
शब्दभेद/रूपभेद
व्युत्पत्ति
शब्दार्थ एवं प्रयोग
देखो 'नन्नौ' (रू.भे.)
उदा.--
सत्यवंत दातार छै नि
ननु
ति भणियु नथी। अथवा सूं ते वीसर्यु? संदेह सूं कहीइ कथी।--नळाख्यांन
ननौ, नन्नौ
1.'न' अक्षर।
उदा.--
हहौ करै हित हांण। झझौ तन व्याध जगावै। धधौ राज भय धरै, ररौ धन नास करावै। घघौ घरण घट घाट, न्रिफळ कर
ननौ
निमाड़ै। खय जस करै खकार, भभौ परदेस भ्रमाड़ै।--र.रू.
उदा.--
2..बावन आखर में वडौ,
नन्नौ
आखर सार। दद्दौ तौ जांणूं नहीं, लल्लै आखर प्यार।--अज्ञात
2.न या नहीं का बोधक शब्द, नहीं।
मुहावरा--
एक ननौ ससौ रोग टाळै--एक नहीं कहना अनेक विपत्तियों से छुटकारा दिलाता है।
3.अस्विकार, असहमति, इन्कार।
उदा.--
रत ज्यूं दत जाचक रसक, जाचै बे कर जोड़।
ननौ
भणै नवनार ज्यूं, मूढ़ क्रपण मुख मोड़।--बां.दा.
रू.भे.
नन, ननु।
अल्पा.
ननियौ।
(सं.न)
अव्य.--
नोट:
पद्मश्री डॉ. सीताराम लालस संकलित वृहत राजस्थानी सबदकोश मे आपका स्वागत है। सागर-मंथन जैसे इस विशाल कार्य मे कंप्युटर द्वारा ऑटोमैशन के फलस्वरूप आई गलतियों को सुधारने के क्रम मे आपका अमूल्य सहयोग होगा कि यदि आपको कोई शब्द विशेष नहीं मिले अथवा उनके अर्थ गलत मिलें या अनैक अर्थ आपस मे जुड़े हुए मिलें तो कृपया admin@charans.org पर ईमेल द्वारा सूचित करें। हार्दिक आभार।
राजस्थानी भाषा, व्याकरण एवं इतिहास
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