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नभ  
शब्दभेद/रूपभेद
व्युत्पत्ति
शब्दार्थ एवं प्रयोग
सं.पु.
सं.नभम्‌
1.आकाश, आसमान।
  • उदा.--बैरी बैर न वीसरै, बिनां हियै ही 'बंक'। राह ग्रहै राकेस नूं, नभ सिर मात्र निसंक।--बां.दा.
2.भादौ मास, भाद्रपद।
  • उदा.--आदि पक्ख अस्टमी मास नभ सुभ गुण मंडित। सपतिपुरी मणि मुकट खेत्र मधुपुरी अखंडित।--रा.रू.
3.सूर्य वंशी राजा निषध के पुत्र का नाम.
4.श्रावण मास (डिं.को.).
5.जन्म कुण्डली में लग्न से दसवां स्थान.
6.मेघ, बादल।
रू.भे.
नह।
(सं.नभस्य)
(सं.नभ:)


नोट: पद्मश्री डॉ. सीताराम लालस संकलित वृहत राजस्थानी सबदकोश मे आपका स्वागत है। सागर-मंथन जैसे इस विशाल कार्य मे कंप्युटर द्वारा ऑटोमैशन के फलस्वरूप आई गलतियों को सुधारने के क्रम मे आपका अमूल्य सहयोग होगा कि यदि आपको कोई शब्द विशेष नहीं मिले अथवा उनके अर्थ गलत मिलें या अनैक अर्थ आपस मे जुड़े हुए मिलें तो कृपया admin@charans.org पर ईमेल द्वारा सूचित करें। हार्दिक आभार।






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