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नव  
शब्दभेद/रूपभेद
व्युत्पत्ति
शब्दार्थ एवं प्रयोग
वि.
सं.
नया, नूतन, नवीन (डिं.को.)
  • उदा.--1..फागण मास बसंत रितु, नव तरुणी नव नेह। कहौ सखी कैसे सहूं, च्यार अगन इक देह।--अज्ञात
  • उदा.--2..मिळतां रांण घरै महाराजा, ऊछब प्रगटै मिटै अकाजा। जिती वस्त नित अम्रत जोड़ां, राजै नव नव भांत रसोड़ां।--रा.रू.
  • उदा.--3..फागण मास सुहामणउ, फाग रमइ नव वेस। मो मन खरउ उमाहियउ, देखण पूगळ देस।--ढो.मा.
2.दस से एक कम, आठ और नौ (डिं.को.)
  • उदा.--अह माथै रांग आभ लग ऊंचौ, नव खंडे जस झालर नाद। रोप्या भला रायपुर रांणा, पड़ै न सासण तणा प्रसाद।--दुरसौ आढ़ौ
  • उदा.--1..नीचौ जावै नीर ज्यूं, जग नव नहचै जांण। सकळ पदारथ सार री, ह्वै खिण खिण में हांण।--बां.दा.
  • उदा.--2..कर पारौ काचै कळस, जळ राखियौ न जात। नव नहचै ठहरै नहीं, विदर उदर में वात।--बां.दा.
  • मुहावरा--नव नहचै--अटल, दृढ़, पक्का।
रू.भे.
नउ, नऊं, नब्ब, नवउ, नव्व, नोंऊं, नोऊं।
अल्पा.
नवियौ, नवौ।
(सं.नवन्‌)
सं.पु.
नौ की संख्या, नौ का अंक।


नोट: पद्मश्री डॉ. सीताराम लालस संकलित वृहत राजस्थानी सबदकोश मे आपका स्वागत है। सागर-मंथन जैसे इस विशाल कार्य मे कंप्युटर द्वारा ऑटोमैशन के फलस्वरूप आई गलतियों को सुधारने के क्रम मे आपका अमूल्य सहयोग होगा कि यदि आपको कोई शब्द विशेष नहीं मिले अथवा उनके अर्थ गलत मिलें या अनैक अर्थ आपस मे जुड़े हुए मिलें तो कृपया admin@charans.org पर ईमेल द्वारा सूचित करें। हार्दिक आभार।






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