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नवोढ़, नवोढ़ा
शब्दभेद/रूपभेद
व्युत्पत्ति
शब्दार्थ एवं प्रयोग
सं.स्त्री.
सं.नव+उढ़ा
1.भय और लज्जा के कारण नायक के पास नहीं जाना चाहने वाली वह नायिका जो साहित्य में मुग्धा के अंतर्गत ज्ञात यौवना नायिका का एक भेद है।
उदा.--
लोभांणी
नवोढ़
नेह नसा रा कचोळा लेती, भासै अंग अचोळा सचोळा लेती भाव। करां केतमक्र रैल चोळा लेती तूंजी कना, नक्र रै मचोळा सूं हचीळा लेती नाव।--र.हमीर
2.नव विवाहिता स्त्री, वधू।
उदा.--
जाय
नवोढ़ा
सासरै, आसूं नांख उसास। मावड़िया जावै मुहम, इण विध हुवै उदास।--बां.दा.
3.नवयौवना, नवयुवती, जवान स्त्री।
उदा.--
1..आधी रात न जक पड़ै, लूआं थारै कैर। उठ भागे तड़कै बडै, बडौ
नवोढ़ा
बैर।--लू.
उदा.--
2..कहौ लुवां कित जावसी, पावस घर पड़ियांह। हियै
नवोढ़ा
नार रै, बालम बीछड़ियांह।--अज्ञात
नोट:
पद्मश्री डॉ. सीताराम लालस संकलित वृहत राजस्थानी सबदकोश मे आपका स्वागत है। सागर-मंथन जैसे इस विशाल कार्य मे कंप्युटर द्वारा ऑटोमैशन के फलस्वरूप आई गलतियों को सुधारने के क्रम मे आपका अमूल्य सहयोग होगा कि यदि आपको कोई शब्द विशेष नहीं मिले अथवा उनके अर्थ गलत मिलें या अनैक अर्थ आपस मे जुड़े हुए मिलें तो कृपया admin@charans.org पर ईमेल द्वारा सूचित करें। हार्दिक आभार।
राजस्थानी भाषा, व्याकरण एवं इतिहास
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