वि.
सं.
1.जो सहारे पर न हो या जिसे सहारा न हो, आश्रय व अवलंबरहित।
2.जो प्रमाणों द्वारा सत्य साबित न हो, झूठ, मिथ्या, बेबुनियाद, अयुक्त।
3.जो अन्न, जल आदि ग्रहण किया हुआ न हो, जो बिना अन्न आदि के हो।
4.जिसे जीविका आदि का सहारा न हो, जिसमें जीवन-निर्वाह सम्बन्धी आश्रय न हो।
5.मायिक विषयों के आश्रय से रहित।
- उदा.--जब निराधार मन रह गया, आतम के आनंद। दादू पीवै रांमरस, भेटै परमानंद।--दादूबांणी
6.जो किसी आश्रय से परे हो, जिसे किसी आश्रय या आधार की आवश्यकता न हो (परब्रह्म, ईश्वर)
- उदा.--1..निराधार निज भक्ति कर, निराधार निजसार। निराधार निज नांम ले, निराधार निराकार।--दादूबांणी
- उदा.--2..निराधार निज रांम रस, को साधू पीवणहार। निराधार निरमळ रहै, दादू ग्यांन विचार।--दादूबांणी