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निराधार  
शब्दभेद/रूपभेद
व्युत्पत्ति
शब्दार्थ एवं प्रयोग
वि.
सं.
1.जो सहारे पर न हो या जिसे सहारा न हो, आश्रय व अवलंबरहित।
2.जो प्रमाणों द्वारा सत्य साबित न हो, झूठ, मिथ्या, बेबुनियाद, अयुक्त।
3.जो अन्न, जल आदि ग्रहण किया हुआ न हो, जो बिना अन्न आदि के हो।
4.जिसे जीविका आदि का सहारा न हो, जिसमें जीवन-निर्वाह सम्बन्धी आश्रय न हो।
5.मायिक विषयों के आश्रय से रहित।
  • उदा.--जब निराधार मन रह गया, आतम के आनंद। दादू पीवै रांमरस, भेटै परमानंद।--दादूबांणी
6.जो किसी आश्रय से परे हो, जिसे किसी आश्रय या आधार की आवश्यकता न हो (परब्रह्म, ईश्वर)
  • उदा.--1..निराधार निज भक्ति कर, निराधार निजसार। निराधार निज नांम ले, निराधार निराकार।--दादूबांणी
  • उदा.--2..निराधार निज रांम रस, को साधू पीवणहार। निराधार निरमळ रहै, दादू ग्यांन विचार।--दादूबांणी
रू.भे.
निरधार।


नोट: पद्मश्री डॉ. सीताराम लालस संकलित वृहत राजस्थानी सबदकोश मे आपका स्वागत है। सागर-मंथन जैसे इस विशाल कार्य मे कंप्युटर द्वारा ऑटोमैशन के फलस्वरूप आई गलतियों को सुधारने के क्रम मे आपका अमूल्य सहयोग होगा कि यदि आपको कोई शब्द विशेष नहीं मिले अथवा उनके अर्थ गलत मिलें या अनैक अर्थ आपस मे जुड़े हुए मिलें तो कृपया admin@charans.org पर ईमेल द्वारा सूचित करें। हार्दिक आभार।






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