सं.पु.
सं.
1.पाँच प्रकार के रत्न यथा--माणिक्य, पन्ना (मरकत), पुष्पराज, हीरा व नीलम। मतान्तर--सोना, चाँदी, मोती, लाजावर्त व मूंगा। मतान्तर--सुवर्ण, हीरा, नीलम, पद्मराग व मोती। मतान्तर--नीलम, हीरा, पद्मराग, मोती व मूंगा।
2.श्रीअच्युत विरचित एक स्तोत्र का नाम।
3.अनुस्मृति, गजेन्द्रमोक्ष, गीता, भीष्मस्तव और विष्णुसहस्रनाम--इन पांच ग्रंथों के संग्रह का नाम।
- उदा.--पर निंदा आठूं पहर, चाटै विख री चाठ। क्यों नंह तू प्रांणी करै, पंचरतन रौ पाठ।--बां.दा.