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पीय
शब्दभेद/रूपभेद
व्युत्पत्ति
शब्दार्थ एवं प्रयोग
1.देखो 'प्रिय' (रू.भे.)
उदा.--
1..मिगसर पाळौ चमंकियौ, प्यारौ लागौ सीय। प्यारी मीठी पीव नूं, प्यारी मीठौ
पीय
।--कुंवरसी सांखला री वारता
उदा.--
2..लाधौ हिव प्रभ्भु पड़दौ लाय। मुरारि परत्तख बाहिर माय। ठगारा ठाकुर हेकौ थीय। पड़दौ नांख परौ हिव
पीय
।--ह.र.
2.देखो 'पिता' (रू.भे.)
उदा.--
अह दैवह वसि तेवि पंच ए पंडव वणि चलिय। हथिणाउरि जाएवि मुकलावइ निय माय
पीय
।--पं.पं.च.
नोट:
पद्मश्री डॉ. सीताराम लालस संकलित वृहत राजस्थानी सबदकोश मे आपका स्वागत है। सागर-मंथन जैसे इस विशाल कार्य मे कंप्युटर द्वारा ऑटोमैशन के फलस्वरूप आई गलतियों को सुधारने के क्रम मे आपका अमूल्य सहयोग होगा कि यदि आपको कोई शब्द विशेष नहीं मिले अथवा उनके अर्थ गलत मिलें या अनैक अर्थ आपस मे जुड़े हुए मिलें तो कृपया admin@charans.org पर ईमेल द्वारा सूचित करें। हार्दिक आभार।
राजस्थानी भाषा, व्याकरण एवं इतिहास
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