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बयार
शब्दभेद/रूपभेद
व्युत्पत्ति
शब्दार्थ एवं प्रयोग
सं.स्त्री.
सं.वायु:
पवन, वायु।
उदा.--
1. बैरी तरवर हमहैं
बयार,
तारुन्य मरुन तत्पर तयार। पावहु पवित्र प्रहरन प्रसाद, पिहुक्ख प्रयांन पक्खर प्रनाद।--ऊ.का.
उदा.--
2. अंबा डार कोयलियां बोलै, बहत बसंती
बयार
मां। कुंज--कुंजज रसराज दंपत जहां, भंवरन ज्यूं मिल डोलै।--रसीलैराज रा गीत
रू.भे.
वयार।
नोट:
पद्मश्री डॉ. सीताराम लालस संकलित वृहत राजस्थानी सबदकोश मे आपका स्वागत है। सागर-मंथन जैसे इस विशाल कार्य मे कंप्युटर द्वारा ऑटोमैशन के फलस्वरूप आई गलतियों को सुधारने के क्रम मे आपका अमूल्य सहयोग होगा कि यदि आपको कोई शब्द विशेष नहीं मिले अथवा उनके अर्थ गलत मिलें या अनैक अर्थ आपस मे जुड़े हुए मिलें तो कृपया admin@charans.org पर ईमेल द्वारा सूचित करें। हार्दिक आभार।
राजस्थानी भाषा, व्याकरण एवं इतिहास
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