वि.
सं.बहल
1.अत्यधिक, बहुत, प्रचुर, विपुल।
- उदा.--1..बहळ ससियळ धमक साबळ। वहै कळकळ प्रबळ वीजळ। चकळ इळतळ वितळ चळचळ। मंगळ झळ चंड धमळ मंगळ। विढ़ै सूर व्रजागि।
- उदा.--2..मेहां बूठां अन बहळ, थळ ताढ़ा जळ रेस। करसण पाका कण खिरा, तद कउ वळण करेस।--ढो.मा.
- उदा.--3..तिण गढ़ मांहै वावड़ी कूआ तळाव जळ बहळ धांन घ्रित तेल लूण खड़ इंधण अमल कपड़ौ घणौ अपार संचौ किऔ छै।--रा.सा.सं.
4.गाढ़ा, घना। सं.पु.(सं.बहल:)
2.कीचड़, पंक, कादा। सं.स्त्री.--
3.बैलों द्वारा खींची जाने वाली जनानी सवारी गाड़ी, जिसे कपड़े तान कर ऊपर से बंद कर दिया जाता है।
- उदा.--1..वे तौ ढोला घोड़लियां असवार पन्ना जी मारू म्हांनै गुजराती बहल जुता दो ये राज।--लो.गी.
- उदा.--2..उहीज बहल जोतराय पाछौ आदमी साथै दे मेलीया।--नैणसी
5.देखो 'बळद' (रू.भे.)
- उदा.--हलि चली घणां बहलां हलां, ब्याळ टळां आगी बढ़ी। मातंग भुजंग नाहर मगर, कोल--मुखी बाहर कढ़ी।--मे.म.
रू.भे.
बहिल, बहिल्ल, बे'ल, बेहल, बैल, बैहल, बौहल, वहळ, वहल, वहिल, वहिल्ल, वाहल।
अल्पा.
बहली, बहलौ, बैलड़ली, बैलड़ी, वहलि, वहली।