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बहाल  
शब्दभेद/रूपभेद
व्युत्पत्ति
शब्दार्थ एवं प्रयोग
वि.
फा.ब.+अ.हाल
1.ज्यों का त्यों बना हुआ, कायम, बरकार।
  • उदा.--सौ ऊ पकड़ियौ आयौ थौ सो छोड दियौ उण री माल मल्कियत बहाल राखी।--नी.प्र.
2.पूर्व स्थिति या अवरथा को प्राप्त किया हुआ, पुननियुक्त। (बरख्वास्त कर्मचारी)
  • उदा.--सौ पातसाह कनै जाय बहाल होय वाहीज खिजमत ले'र फेर उठै हीज आयौ।--प्रतापसिंघ म्होकमसिंघ री वात
3.अच्ठी अवस्था में, भला चंगा, स्वस्थ।
4.उत्साह युक्त, स्फूर्तिला, साहसी।
  • उदा.--फिर नकीब बोलीया, चढ़ौ बा'दरां बहालां। दरक भार भिड़जै, घ्रीह गरहरै त्रबाळां। मदमता खोलजै धता--धता पूंतारै। कोडी कां कोतलां, साज सौन सिणगारै। चढ़ियौ अबीह, ढुळतै चमर धजाबंध दिल धारीयौ। इण भांत दिली राजा 'अभौ', परथीनाथ पधारीयौ।--बखतौ खिड़ियौ
रू.भे.
ब्हाल।


नोट: पद्मश्री डॉ. सीताराम लालस संकलित वृहत राजस्थानी सबदकोश मे आपका स्वागत है। सागर-मंथन जैसे इस विशाल कार्य मे कंप्युटर द्वारा ऑटोमैशन के फलस्वरूप आई गलतियों को सुधारने के क्रम मे आपका अमूल्य सहयोग होगा कि यदि आपको कोई शब्द विशेष नहीं मिले अथवा उनके अर्थ गलत मिलें या अनैक अर्थ आपस मे जुड़े हुए मिलें तो कृपया admin@charans.org पर ईमेल द्वारा सूचित करें। हार्दिक आभार।






राजस्थानी भाषा, व्याकरण एवं इतिहास

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