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बाग  
शब्दभेद/रूपभेद
व्युत्पत्ति
शब्दार्थ एवं प्रयोग
सं.पु.
फा.
1.बगीचा, उद्यान, उपवन। (अ.मा.)
  • उदा.--1..सपत कोस कनवज हूं सोहत। मदन विनोद बाग मन मोहत। असट बील तर अवर अळथाहै। मूरत पार केस तिण माहै।
  • उदा.--2..तन दुख नीर तड़ाग, रोज विहंगम रूखड़ौ। विसन सलीमुख बाग, जरा बरक ऊतर जबळ।--बां.दा.
  • मुहावरा--बाग--बाग होणौ--प्रफुल्लित होना, हषित होना।
2.बागडोर, लगाम, रास। (डिं.को.)
  • उदा.--1..ऊपड़ै बाग घोड़ां उठै, देख हाथ 'बीकम' दुवा। सुणि इसा बैण सैना सझण, हुकम का कारखांनां हुवा।--मे.म.
  • उदा.--2..ठाकर ई आपर्रै कल्पना रै घोड़ां री बागां छीली छोड मेली ही--ऊंध में ईज गुणगुणावण लाग्यौ।--रातवासौ
  • मुहावरा--1.बाग झेलणी--कार्यभार सम्भालना, उत्तरदायित्व लेना।
  • मुहावरा--2.बाग मोड़णी--एक ओर चलते हुए को दूसरी ओर प्रवृत्त करना, घुमाना।
  • मुहावरा--3.बाग हाथ सूं छूटणी--स्थिति का काबू से बाहर होना। अवसर चूक जाना।
रू.भे.
बग, बग्ग, वग, वग्ग, वग्गय, वग्घ, वाग, वाघ। (सं.वाक्‌)
3.वाणी, गिरा।
4.सरस्वती।
5.देखो 'वरग' (रू.भे.)
6.देखो 'बाघ' (रू.भे.)
सं.स्त्री.(सं.वल्गा या वागा)


नोट: पद्मश्री डॉ. सीताराम लालस संकलित वृहत राजस्थानी सबदकोश मे आपका स्वागत है। सागर-मंथन जैसे इस विशाल कार्य मे कंप्युटर द्वारा ऑटोमैशन के फलस्वरूप आई गलतियों को सुधारने के क्रम मे आपका अमूल्य सहयोग होगा कि यदि आपको कोई शब्द विशेष नहीं मिले अथवा उनके अर्थ गलत मिलें या अनैक अर्थ आपस मे जुड़े हुए मिलें तो कृपया admin@charans.org पर ईमेल द्वारा सूचित करें। हार्दिक आभार।






राजस्थानी भाषा, व्याकरण एवं इतिहास

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