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बागडोर
शब्दभेद/रूपभेद
व्युत्पत्ति
शब्दार्थ एवं प्रयोग
सं.स्त्री.
सं.वल्गा+दोर:
1.लगाम, रास।
2.मौ'री।
उदा.--
आवौ घड़ी एक तौ अमल पांणी करनै भेळा बैसां। पछै थांरै मारग जाजौ नै म्हें म्हारै मारग जासां युं कहिनै ऊंमर ढोलोजी रौ करहौ
बागडोर
झालनै जैकीयौ।--ढो.मा.
3.किसी काशर्य का उत्तरदायित्व व जिम्मेदारी। क्रि.प्र.--झेलणी, संभालणी।
मुहावरा--
बागडोर सम्भाळणी--किसी कार्य को बिगड़ने से बचाना, नुकसान होने से पूर्व ही उसके बचाव की व्यवस्था कर देना।
रू.भे.
वागडोर।
नोट:
पद्मश्री डॉ. सीताराम लालस संकलित वृहत राजस्थानी सबदकोश मे आपका स्वागत है। सागर-मंथन जैसे इस विशाल कार्य मे कंप्युटर द्वारा ऑटोमैशन के फलस्वरूप आई गलतियों को सुधारने के क्रम मे आपका अमूल्य सहयोग होगा कि यदि आपको कोई शब्द विशेष नहीं मिले अथवा उनके अर्थ गलत मिलें या अनैक अर्थ आपस मे जुड़े हुए मिलें तो कृपया admin@charans.org पर ईमेल द्वारा सूचित करें। हार्दिक आभार।
राजस्थानी भाषा, व्याकरण एवं इतिहास
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