सं.स्त्री.
सं.वापि, वापी
1.चारों ओर से खुला हुआ चौड़े मुंह का एक प्रकार का कुआ जिसमें नीचे तक पहुंचने के लिये एक तरफ सीढ़ियां बनी होती है, बाउली।
- उदा.--1..पाहण गळ बांधै पड़ौ, बेरां बावड़ियाह। पिण मंगण मत पारथौ, मुजळां मावड़ियांह।--बां.दा.
- उदा.--2..सोझत था कोस
3.खरककूण मांहै। सीरवी बांझण बांणीया रजपूत बसै। बावड़ी
2.बी.वीदा री कराई छै। ऊनाळी अरट 45 तथा 50 गेंहू बण केढ़ोतरा हुवै, बरसाळी खेत सखरा खेत
10.चींणा रा। तळाव एक चेहनडी गांव नजीक छै।--नैणसी
2.बांसुरी में फूंक देने का नीचे का स्थान जहां खड्डा होता है।
रू.भे.
बाउड़ी, बाबड़ी, वावड़ी, वावळि, वावळी।
अल्पा.
बावड़ली। मह.--बाव, वाव।