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बेद
शब्दभेद/रूपभेद
व्युत्पत्ति
शब्दार्थ एवं प्रयोग
वि.
1.भेद।
उदा.--
हुवा प्रकट मांणिक्क हूं, एगारह ए भेद। पूरबिया कढ़िया प्रथम, बाहर इस सब
बेद
।--व्र.भा.
2.देखो 'वूद' (रू.भे.) (डिं.को.)
उदा.--
1..दोनों ही पोकर में दांन पुन्नि कीनां। दोनों ही
बेद
की भ्रजाद, ब्याहि लीनां।--शि.वं.
उदा.--
2..बिद्या
बेदां
में बैदिक बिधि बरणी, अपणी, करणी सूं जग पार उतरणी। निरभय नीयंतां यंता नरनारी, करता बिस्वंभर भरता सुखकार।--ऊ.का.
उदा.--
3..एक बीसमां पातसाह सहमूद रै मरियां पछै विक्रम रा ब्योम बाजी
बेद
बिधु सम्मित साह रै समय मुलतांन रा सूबादार स्ययद मलिक सुलेमांन रै पुत्र खिजरखांन नांम तेवीसमै पातसाह दिल्ली रौ अधिराजभाव गहियो।--वं.भा.
3.देखो 'वैद्य' (रू.भे.)
उदा.--
गरमी होवे गात, जदे
बेदां
घर जावै। ओखद मूंडे आंण, छेल लाळां छिटकावै।--ऊ.का.
नोट:
पद्मश्री डॉ. सीताराम लालस संकलित वृहत राजस्थानी सबदकोश मे आपका स्वागत है। सागर-मंथन जैसे इस विशाल कार्य मे कंप्युटर द्वारा ऑटोमैशन के फलस्वरूप आई गलतियों को सुधारने के क्रम मे आपका अमूल्य सहयोग होगा कि यदि आपको कोई शब्द विशेष नहीं मिले अथवा उनके अर्थ गलत मिलें या अनैक अर्थ आपस मे जुड़े हुए मिलें तो कृपया admin@charans.org पर ईमेल द्वारा सूचित करें। हार्दिक आभार।
राजस्थानी भाषा, व्याकरण एवं इतिहास
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