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बैला  
शब्दभेद/रूपभेद
व्युत्पत्ति
शब्दार्थ एवं प्रयोग
सं.पु.
सं.बलीवर्द
1.गऊ पुत्र एक प्रसिद्ध चौपाया जिसे बधिया करके नाक में नाथ डाल कर गाड़ी जोतने व खेती आदि के काम में लिया जाता है। वृषभ। (ह.नां.मा.)
  • उदा.--रह तोप हरोळ रुखी, मक्र कोल गयंद मयंद मुखी। हचकै बहु बैल करै हमला, टहलै लगि गैल गयंद टला।--मे.म.
2.शिव की सवारी का नन्दी। शिव--वाहन।
  • उदा.--चढ़ी नभ रेण छई चहुंचक्क, धरा चढ़ी कंप थई धकधक्क। गई चढ़ि चील्हणि गीधणि गैण, नसौ करि बैल चढ़्‌यौ त्रण--नैण।--मे.म.
रू.भे.
बइल, बइल्ल, बयल, बयल्ल, बेल, बैहल, वहिल, वहिल्ल।
अल्पा.
बेलियौ, बैलियो, बैल्यौ, बोहलियौ, बौहलिया।
3.देखो 'बहल' (रू.भे.)
  • उदा.--सथिया देवण मोहे बुलायी, रुण--झुण बैल जुड़ायी, मोरी सइयां ए रुण--झुण वहल जुड़ायी।--लो.गी.


नोट: पद्मश्री डॉ. सीताराम लालस संकलित वृहत राजस्थानी सबदकोश मे आपका स्वागत है। सागर-मंथन जैसे इस विशाल कार्य मे कंप्युटर द्वारा ऑटोमैशन के फलस्वरूप आई गलतियों को सुधारने के क्रम मे आपका अमूल्य सहयोग होगा कि यदि आपको कोई शब्द विशेष नहीं मिले अथवा उनके अर्थ गलत मिलें या अनैक अर्थ आपस मे जुड़े हुए मिलें तो कृपया admin@charans.org पर ईमेल द्वारा सूचित करें। हार्दिक आभार।






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